उत्‍तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था

उ० प्र० सरकार के अधीनस्थ स्वायतशासी संस्था

परिचय

स्थापना

भारतीय बीज अधिनियम- 1966 की धारा-8 के अधीन दिनांक 5 अक्टूबर 1976 को उ.प्र. राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था की स्थापना की गयी तथा इसे सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 में विहित प्राविधानों के अन्तर्गत पंजीकृत कराया गया। संस्था की पंजीयन संख्या 1021/1976-1977 है। संस्था ने प्रदेश में बीजों के प्रमाणीकरण का कार्य फसल सत्र खरीफ 1977 से प्रारम्भ किया।

उद्देश्य

  • बीज अधिनियम 1966 की धारा-8 के अंर्तगत स्थापित बीज प्रमाणीकरण अभिकरण के समस्त निर्धारित दायित्वो की पूर्ति करना।
  • प्रदेश के कृषकों/बीज उत्पादक संस्थाओं द्वारा बीजोत्पादन हेतु बोई गई एवं पंजीकृत करायी गई बीज फसलों का भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों का पालन करते हुए फसल स्तर पर तथा बीज स्तर पर प्रमाणीकरण करना।
  • बीज उत्पादन कार्यक्रम में प्रमाणित बीजों की आनुवांशिक शुद्धता, भौतिक शुद्धता एवं अंकुरण क्षमता मानको के अनुरूप सुनिश्चित कराना ।
  • प्रमाणित बीजों मे आनुवंशिक व भौतिक शुद्धता तथा अंकुरण क्षमता मानकों के अनुरूप सुनिश्चित कराना।
  • बीज जनित बीमारियों को भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों के अनुरूप नियंत्रित रखना।
  • बीज प्रमाणीकरण प्रकिया के माध्यम से प्रदेश के कृषकों को उच्च गुणता वाले बीज सुलभ कराना।
  • प्रदेश की बीज प्रतिस्थापन दर में अपेक्षित वृद्धि हेतु प्रशिक्षण तथा प्रचार/प्रसार के माध्यम से कृषकों में प्रमाणित बीजों के प्रयोग एवं बीजोत्पादन कार्य के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।

अधिकार

  • बीज अधिनियम 1966 की धारा-9 के अन्तर्गत बीज प्रमाणीकरण संस्था के निम्न अधिकार प्रदत्त है-
    • किसी बीज उत्पादक अथवा उत्पादक संस्था के स्तर से अधिसूचित किस्म या उप-किस्म के बीजों के प्रमाणीकरण हेतु आवेदन प्राप्त होने पर प्रमाणीकरण संस्था इसे स्वीकार कर सकेगी।
    • उप धारा- 1. के अधीन हर आवेदन ऐसे प्रारूप में स्वीकार किया जायेगा कि उसमे ऐसी विशिष्टियॉ अन्तर्दिष्ट होगी और उसके साथ ऐसी फीस होगी जो विहित की गयी हो।
    • प्राप्त आवेदन पत्र पर संस्था ऐसी जॉच के पश्चात जो वह ठीक समझे तथा यह सुनिश्चित करते हुए कि वह बीज धारा-6 के खण्ड- (क) के अधीन निर्धारित मानकों के अनुरूप है, एक प्रमाण पत्र ऐसे प्रारूप में और ऐसी शर्तों सहित अनुदत्त कर सकेगी जो विहित की गयी है।
  • बीज अधिनियम 1966 की धारा- 10 के अन्तर्गत संस्था को प्रमाण-पत्र के प्रति संहरण का अधिकार निम्न दशाओं में प्रदत्त है-
    • धारा-9 के अधीन उसके द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र किसी आवश्यक तथ्य के बारे में दर्व्यपदेशन द्वारा अभिप्राय किया गया है, अथवा
    • प्रमाण पत्र का धारक उन शर्तों के अनुपालन में जिनके अध्यधीन कि प्रमाण पत्र अनुदत्त किया गया है, युक्तियुक्त हेतुक के बिना असफल रहा है या उसने इस अधिनियम या तदधीन बनाये गये नियमों के उपबन्धों में से किसी का उल्लंघन किया गया है, तो किसी ऐसी अन्य शास्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जिसका कि प्रमाण पत्र का धारक इस अधिनियम के अधीन दायी हो संस्था प्रमाण पत्र धारक को हेतुक दर्शित करने का अवसर देने के पश्चात प्रमाण पत्र को प्रति संहृत कर सकेगी।
  • भारतीय न्यूनतम बीज प्रमाणीकरण मानकों से प्राविधानिक अन्य अधिकार।