उत्‍तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था

उ० प्र० सरकार के अधीनस्थ स्वायतशासी संस्था

प्रमाणीकरण प्रक्रिया

बीज प्रमाणीकरण के चरण

  • पंजीयन आवेदन पत्र प्राप्त कर उनकी जाँच करना।
  • बोये गये बीज का वर्ग एवं अन्य आवश्यक अभिलेख देखकर बीजस्रोत सत्यापन पूर्ण करना।
  • निर्धारित फसल मानकों को सुनिश्चित कराने हेतु फसल क्षेत्र का निरीक्षण करना।
  • कटाई उपरान्त क्रियाओं-यथा- विधायन एवं पैकिंग कार्य का निर्देशन करना।
  • न्यादर्शवरण कर बीज परीक्षण पूर्ण कराना तथा आनुवांशिकी शुद्वता, बीज स्वास्थ्य आदि के निर्धारित मानकों को सुनिश्चित कराना।
  • मानक पाये गये बीजों की टैगिंग कराना।
  • बीज उत्पादकों से प्राप्त आवेदन पत्रों की जाँच करना।
  • पंजीयन के उपरान्त खेतों का निरीक्षण संस्था द्वारा विभिन्न अवस्थाओं पर निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है।
  • प्रथम निरीक्षण के समय उत्पादक द्वारा सुरक्षित रखें गयें क्रय रसीद /बीज थैलों एवं टैग आदि के आधार पर बीजस्रोत का सत्यापन किया जाता है।
  • फसल निरीक्षण के समय बीज खेत से अवॉछनीय तथा रोग ग्रसित पौधों की पहचान कराते हुए रोगिंग (निष्कासन) हेतु निर्देशित किया जाता है।
  • अन्तिम निरीक्षण पर मानकों के अनुरूप पायी गई फसलों को प्रमाणीकरण के योग्य घोषित किया जाता है।
  • बीजों का विधायन बीज विधायन संयंत्र पर बीजों की मात्रा फसलवार 100, 200 व 400 कु0 तक बीज लॉट बनाते हुए कराया जाता है। प्रत्येक बीज लॉट से बीज नमूना परीक्षण हेतु कोड़िंग अनुभाग को प्रेषित किये जाते है। जो परीक्षण हेतु डि कोड करते हुए संस्था की 05 प्रयोगशालाओं में से किसी एक में रैण्डम आधार पर भेजे जाते है।
  • बीज परीक्षण प्रयोगशाला में बीजों की शुद्वता, जमाव व रोग सम्बन्धी परीक्षण (लॉट्स की आवश्यकतानुसार) पूर्ण कर परिणाम प्रेषित किये जाते है। मानक पाये गये बीज लॉटो को रसायन से उपचारित कराते हुए बीज थैलों पर टैग एवं सील संस्था द्वारा लगवाई जाती है।
  • संस्था द्वारा आधारीय बीजों हेतु सफेद रंग तथा प्रमाणित बीजों हेतु नीले रंग के टैगों का प्रयोग किया जाता है।

प्रमाणीकरण हेतु फसलों/किस्मों की पात्रता

प्रमाणीकरण हेतु केवल वे ही फसलें / किस्में जो बीज अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत अधिसूचित समस्त फसल प्रजातियां प्रमाणीकरण के लिए अर्ह होती हैं ।

बीज

फसल उत्पादन बढाने के लिए स्वस्थ्य एवं अनुवांशिक रूप से शुद्ध बीज एक महत्वपूर्ण अवयव है।

बीजोत्पादन हेतु उपयुक्त बीजों की श्रेणी/बीज स्त्रोत

बीजोत्पादन कार्यक्रम में प्रजनक (ब्रीडर) से आधारीय एवं आधारीय से प्रमाणित श्रेणी के बीजों का ही पंजीयन किया जाता है।

उन्नत बीज की श्रेणी

  • न्यूक्लिअस बीज: न्यूक्लिअस बीज प्रजनक (ब्रीडर)/वैज्ञानिक द्वारा स्वयं तैयार किया जाता है जो अनुवांशिक रूप से शत प्रतिशत शुद्ध होता है।
  • प्रजनक (ब्रीडर) बीज: न्यूक्लिअस (केन्द्रीय) बीज से प्रजनक बीज स्वयं (वैज्ञानिक) की देख रेख में तैयार किया जाता है। यह न्यूकिलयस बीज की संतति होती है। प्रजनक (ब्रीडर) बीज के बोरे पर पीले/सुनहरे रंग का लेबिल लगा होता है।
  • आधारीय बीज: इसका उत्पादन बीज प्रमाणीकरण संस्था की निगरानी में किया जाता है। यह प्रजनक (ब्रीडर) बीज की संतति होती है, आधारीय बीज के थैलों पर प्रमाणीकरण संस्था का सफेद रंग का टैग लगा होता है।
  • प्रमाणित बीज: यह बीज आधारीय बीज से तैयार किया जाता है। आधारीय बीज का संतति होती है। इसका बीज उत्पादन, बीज प्रमाणीकरण संस्था की देख रेख में किया जाता है। यह भी भौतिक एवं अनुवांशिक रूप से शुद्ध होता है।

प्रमाणित बीज का महत्व

प्रमाणित बीज अनुवांशिक एवं भौतिक रूप से शुद्ध होते हैं तथा पौधों में एकरूपता, गुणों में समानता एवं पकने की अवधि एक पायी जाती है। प्रमाणित बीज की अंकुरण क्षमता उत्तम होती है तथा दाना पुष्ट, भरा व चमकदार होता है। प्रमाणित बीज के उपयोग से सामान्य बीज की अपेक्षा उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है।